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सरकारी आंकड़े 446, जबकि पटना के 3 श्मशानों में ही हुए कोरोना प्रोटोकॉल से 1648 अंतिम संस्कार

Published on : Jun 3, 2021, 15:57 PM
By : Anirudh kumar
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HIGHLIGHTS

  • मई महीने के सरकारी आंकड़े में बताई गई पटना में 446 मौतें मौतों

पटना: बिहार में कोरोना की लहर धीरे-धीरे थमती नजर आ रही है, संक्रमण दर 3 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है, लेकिन पिछले मई महीने में कोरोना की बात करें तो यह पीक अवर पर थी। न जाने कितनी जिंदगियां कोरोना ने निगल ली। दर्जनों वैसे लोगों की मौत हो गई, जो हमारे और आपके रिस्तेदार थे या फिर हम आप उन्हें बहुत नजदीक से जानते थे। 

मई महीने में यदि मौत की हम बात करें तो सरकारी आंकड़ो के मुताबिक राजधानी पटना में कुल 446 मौतें हुई है। लेकिन सच्चाई कुछ और हीं है। शहर के तीन प्रमुख श्मशान की बात करें, तो बांस घाट पर 901,  गुलबी घाट पर 597 और खाजेकलां घाट पर 150 यानी कुल 1,648 लाशें कोविड प्रोटोकोल के तहत जलाई गई है। इनके अलावा दानापुर घाट, फतुहां घाट और ग्रामीण इलाकों के दूसरे घाटों पर रिकॉर्ड रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए यहां की संख्या बताना मुश्किल है। 

यदि पंचायत और नगर निकाय की बात करें, तो मीडिया हाउस ने जो आंकड़े जुटाए हैं वह काफी डराने वाली। भाष्कर रिपोर्टर ने जो आंकड़ा सामने रखा है, उसके मुताबिक सिर्फ ग्रामीण इलाकों में 447 लोगों की कोरोना से मौत हुई। इसके अलावा 3,162 ऐसे लोगों की मौत हुई जिनकी जांच नहीं हुई लेकिन उनमें कोरोना के लक्षण थे। इस तरह एक महीने में गांवों से 3,609 अर्थियां उठीं। अगर इनमें शहर के आंकड़े भी जोड़ दिए जाएं, तो से संख्या 5000 से ज्यादा हो जाएगी।

हालांकि कोरोना से हुई मौत और सरकारी स्तर पर जारी आंकड़े में कुछ खेल है, जो पटना के जिलाधिकारी भी शायद समझ रहे हैं। तभी तो डीएम चन्द्रशेखर सिंह का कहना है कि जिले में कोरोना से मौत का सर्वे करा रहे हैं। इसे दो दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला कंट्रोल रूम में 300 लोगों ने जानकारी दी है। माना जा रहा है कि सभी जगह से मिलने वाले आंकड़ों के बाद मौत का एक नया आंकड़ा जारी किया जा सकता है। 

हालांकि बहुत ऐसे लोग भी है, जो बिना जांच कराए और अस्पताल पहुंचे दम तोड़ दिया। सैंकड़ो गांवो में अब भी जांच सुविधा उपलब्ध नही है। ये कड़वी सच्चाई अपने जगह है, जबकि सरकार कोरोना से मरने वालों में उन्हें ही गिनेगी जिनकी कोरोना जांच हुई थी और पॉजिटिव थे। उन्हीं के परिवारों को मुआवजा मिलेगा।

सरकार के रिकॉर्ड में मंगलवार तक 5,222 लोग कोरोना से जान गंवा चुके हैं। पटना में कोरोना से अब तक 1,205 मौत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। लेकिन अस्पतालों के मुताबिक पटना जिले में मारे गए लोगों में से 50% से भी कम लोगों के पास कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट थी।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय कहते हैं कि केंद्र की जो गाइडलाइन हैं, उसके मुताबिक ही काम कर रहे हैं। कई लोगों के लंग्स में इंफेक्शन था, सभी का प्राथमिकता के तौर पर इलाज किया गया। लेकिन कोरोना से मौत उन्हें ही माना जाता है जिनके पास कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव हो। बिना रिपोर्ट कैसे मानें? मौत की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।

अब सवाल उठता है कि कोरोना की पिक लहर ने जिसे अस्पताल जाने और सोचने समझने का समय नहीं दिया, उसे केन्द्र की गाइडलाइन्स बता कर मुआवजे नहीं दिए जाने की बात कहना इंसानियत से परे होगा। 

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